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वैश्विक तनाव और आर्थिक संकेतों के बीच शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 900 अंक टूटा, निफ्टी 23900 के नीचे फिसला

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घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 900 अंक तक टूट गया, निफ्टी 23900 के नीचे आ गया और रुपये में भी बड़ी कमजोरी देखने को मिली।

घरेलू शेयर बाजार में सोमवार का दिन निवेशकों के लिए बेहद कमजोर साबित हुआ, जब बाजार खुलते ही भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला और कुछ ही समय में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक तेजी से गिरकर लाल निशान में पहुंच गए। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और घरेलू आर्थिक संकेतों को लेकर बनी चिंता ने बाजार के सेंटिमेंट को पूरी तरह कमजोर कर दिया।

सोमवार को बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 950 अंक तक टूटकर 76,378 के स्तर के आसपास पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 275 अंकों से अधिक गिरकर 23,900 के नीचे फिसल गया। कारोबार के दौरान कुछ समय ऐसा भी रहा जब बाजार में गिरावट और तेज हो गई और निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी दर्ज की गई। लगातार दूसरे दिन आई इस गिरावट ने यह संकेत दिया कि बाजार अभी भी दबाव की स्थिति में है और रिकवरी की गति कमजोर बनी हुई है।

इस गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है, जिसने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने भी चिंता बढ़ाई है, क्योंकि भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने की आशंका भी गहरा गई है, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना है।

इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी निवेशक लगातार जोखिम वाले बाजारों से पूंजी निकाल रहे हैं, जिससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है। डॉलर की मजबूती और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।

इस बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की ओर से देशवासियों से किफायत से चलने और अनावश्यक खर्चों से बचने की अपील का असर भी बाजार में देखने को मिला। सरकार की ओर से विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रखने और घरेलू संसाधनों के संतुलित उपयोग की अपील के बाद कुछ सेक्टरों में विशेष रूप से ज्वैलरी और लग्जरी खपत से जुड़े शेयरों में बिकवाली बढ़ गई।

ज्वैलरी सेक्टर की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसमें निवेशकों ने भारी मुनाफावसूली की। बाजार में यह धारणा बनी कि यदि उपभोक्ता मांग पर असर पड़ता है तो कंपनियों की आय पर भी दबाव आ सकता है। इससे पूरे सेक्टर पर नकारात्मक असर देखने को मिला।

इसके साथ ही रुपये में भी भारी कमजोरी दर्ज की गई। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 139 पैसे तक गिरकर 94.90 के स्तर पर पहुंच गया, जो विदेशी मुद्रा बाजार में चिंता का विषय बन गया है। रुपये में गिरावट के कारण आयातित वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है, जिससे महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में यह गिरावट केवल एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि यह वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

वहीं निवेशकों के लिए फिलहाल सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में जल्दबाजी में निवेश निर्णय लेना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि बाजार अभी भी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है।

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